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धनपति कुबेर जी का अहंकार- Shiv Puran

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य ह एक पौराणिक कथा है। धन के देवता कुबेर तीनों लोकों में सबसे धनी थे। एक दिन उन्होंने सोचा कि हमारे पास इतनी संपत्ति है, लेकिन कम ही लोगों को इसकी जानकारी है। इसलिए उन्होंने अपनी संपत्ति का प्रदर्शन करने के लिए एक भव्य भोज का आयोजन करने की बात सोची। उसमें तीनों लोकों के सभी देवताओं को आमंत्रित किया गया।  भगवान शिव उनके इष्ट देवता थे, इसलिए उनका आशीर्वाद लेने वह कैलाश पहुंचे और कहा, प्रभो! आज मैं तीनों लोकों में सबसे धनवान हूँ, यह सब आप की कृपा का फल है। अपने निवास पर एक भोज का आयोजन करने जा रहा हूँ, कृपया आप परिवार सहित भोज में पधारने की कृपा करे।  भगवान शिव कुबेर के मन का अहंकार ताड़ गए, बोले, वत्स! मैं कहीं बाहर नहीं जाता। कुबेर गिड़गिड़ाने लगे, भगवन! आपके बगैर तो मेरा सारा आयोजन बेकार चला जाएगा। तब शिव जी ने कहा, एक उपाय है। मैं अपने छोटे बेटे गणपति को तुम्हारे भोज में जाने को कह दूंगा। कुबेर संतुष्ट होकर लौट आए। नियत समय पर कुबेर ने भव्य भोज का आयोजन किया।  तीनों लोकों के देवता पहुँच चुके थे। अंत में गणपति आए और आते ही कहा, मुझको बहुत तेज भूख लगी है। भोजन कहां है। कुब...

भगवान शिव और देवी सती का विवाह - Shiv Puran

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Bhagwan Shiv & Devi Parvati रा जा दक्ष प्रजापति की कई पुत्रियां थी। सभी पुत्रियां गुणवती थीं, फिर भी दक्ष के मन में संतोष नहीं था। वे चाहते थे उनके घर में एक ऐसी पुत्री का जन्म हो, जो सर्व शक्तिसंपन्न हो एवं सर्व विजयिनी हो। जिसके कारण दक्ष एक ऐसी हि पुत्री के लिए तप करने लगे। तप करते करते अधिक दिन बीत गए, तो भगवती आद्या ने प्रकट होकर कहा, मैं तुम्हारे तप से प्रसन्न हूं। तुम किस कारण वश तप कर रहे हो? दक्ष नें तप करने का कारण बताय तो मां बोली मैं स्वय पुत्री रूप में तुम्हारे यहां जन्म धारण करूंगी। मेरा नाम होगा सती। मैं सती के रूप में जन्म लेकर अपनी लीलाओं का विस्तार करूंगी। फलतः भगवती आद्या ने सती रूप में दक्ष के यहां जन्म लिया। सती दक्ष की सभी पुत्रियों में सबसे अलौकिक थीं। सतीने बाल्य अवस्था में ही कई ऐसे अलौकिक आश्चर्य चलित करने वाले कार्य कर दिखाए थे, जिन्हें देखकर स्वयं दक्ष को भी विस्मयता होती रहती थी। जब सती विवाह योग्य होगई, तो दक्ष को उनके लिए वर की चिंता होने लगी। उन्होंने ब्रह्मा जी से इस विषय में परामर्श किया। ब्रह्मा जी ने कहा, सती आद्या का अवतार हैं। आद्या आदि शक्ति औ...

भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह- Shiv Puran

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🕉 ज ब माता सती के स्वयं को योग अग्नि में भस्म कर लेने का समाचार शिवजी के पास पहुँचा। तब शिवजी ने वीरभद्र को भेजा। उन्होंने वहां जाकर यज्ञ विध्वंस कर डाला और सब देवताओं को यथोचित फल दिया। माता सती ने मरते समय शिव से यह वर मांगा कि हर जन्म में आप ही मेरे पति हों। इसी कारण उन्होंने हिमाचल के घर जाकर पार्वती का जन्म लिया।  जब से पार्वती हिमाचल के घर में जन्म तब से उनके घर में सुख और सम्पतियां छा गई। पार्वती जी के आने से पर्वत शोभायमान हो गया। जब नारद जी ने ये सब समाचार सुने तो वे हिमाचल पहुंचे। वहां पहुंचकर वे हिमाचल से मिले और हंसकर बोले तुम्हारी कन्या गुणों की खान है। यह स्वभाव से ही सुन्दर, सुशील और शांत है। यह कन्या सुलक्षणों से सम्पन्न है। यह अपने पति को प्यारी होगी।  अब इसमें जो दो चार अवगुण है वे भी सुन लो। गुणहीन, मानहीन, माता-पिता विहीन, उदासीन, लापरवाह। इसका पति नंगा, योगी, जटाधारी और सांपों को गले में धारण करने वाला होगा।  यह बात सुनकर पार्वती के माता-पिता चिंतित हो गए। उन्होंने देवर्षि से इसका उपाय पूछा। तब नारद जी बोले जो दोष मैंने बताए मेरे अनुमान से वे सभी शिव...

कथा भगवती माता तुलसी की- Shiv Puran

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  Basil Plant (Tulsi) ए क बार देवराज इंद्र देवगुरू बृहस्पति के साथ भगवान शिव का दर्शन करने कैलाश गए। महादेव ने दोनों की परीक्षा लेनी चाही इसलिए वे रूप बदलकर अवधूत बन गए, और वो निर्वस्त्र भी थे। उनका शरीर जलती हुई अग्नि के समान धधक रहा था और अत्यंत भयंकर नजर आते थे। अवधूत दोनों के रास्ते में खड़े हो गए। इंद्र ने एक विचित्र पुरुष को रास्ते में खड़े देखा तो चौंक गए। इंद्र को देवराज होने का गर्व घेरने लगा। उन्होंने उस भयंकर पुरुष से पूछा तुम कौन हो? भगवान शिव अभी कैलाश पर विराज रहे हैं या कहीं भ्रमण पर हैं। मैं उनके दर्शन के लिए आया हूं। इंद्र ने कई प्रश्न किए लेकिन वह पुरुष योगियों के समान मौन ही रहे। इंद्र को लगा कि एक साधारण प्राणी उनका अपमान कर रहा है। उनके मन में देवराज होने का अहंकार उपजा जो क्रोध में बदल गया। इंद्र ने कहा मेरे बारबार अनुरोध पर भी तू कुछ नहीं बोलकर मेरा अपमान कर रहा है। मैं तुझे अभी दंड देता हूं। ऐसा कहकर इंद्र ने वज्र उठा लिया। भगवान शिव ने वज्र को उसी समय स्तंभित यानी जड़ कर दिया।  इंद्र की बांह अकड़ गई। भगवान अवधूत क्रोध से लाल हो गए। बृहस्पति उनके चेहरे ...

इस प्रकार से हुई देवी के 51 शक्तिपीठों की स्थापना - Shiv Puran

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51 शक्तिपीठ प्र जापति दक्ष की पुत्री सती से भगवान शिव का विवाह हुआ। कुछ समय बाद दक्ष को पूरे ब्रह्माण्ड का अधिपति बना दिया गया। इससे दक्ष में अभिमान आ गया। वह अपने आपको सर्वश्रेष्ठ समझने लगा। एक यज्ञ में भगवान शिव द्वारा खुद को प्रणाम न करने पर दक्ष ने उन्हें अनेक अपशब्द कहे। दक्ष ने शिव को शाप दिया कि उन्हें देव यज्ञ में उनका हिस्सा नहीं मिलेगा।   यह सुनकर नंदी ने भी दक्ष को शाप दिया कि जिस मुंह से वह शिव निंदा कर रहा है वह बकरे का हो जाएगा।   कुछ समय बाद दक्ष ने एक भव्य यज्ञ का आयोजन किया। उसमें सभी देवी-देवताओं को बुलाया गया पर अभिमानी दक्ष ने शिव को उस यज्ञ से बहिष्कृत कर दिया। किसी तरह सती को यह पता चला तो उन्होंने शिव से उस यज्ञ में जाने की अनुमति मांगी। पहले तो शिव ने उन्हें समझाया पर जब वे नहीं मानीं तो उन्होंने सती को वहां जाने की अनुमति दे दी। सती अपने पिता के घर पहुंची तो दक्ष ने उनसे आंखें फेर लीं। सती यज्ञ में शिव का भाग न देखकर रूष्ट हो गईं और सभी को बुरा-भला कहने लगीं।   यह सुनकर दक्ष ने भी शिव निंदा प्रारम्भ कर दी।यह सुनकर सती को बड़ा दुख हु...

कथा भगवान शिव-शंकर के पूर्ण रूप काल भैरव की - Shiv Puran

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Bhagwan Shiva ए क बार की बात है सुमेरु पर्वत पर बैठे हुए ब्रम्हाजी के पास जाकर देवताओं ने उनसे अविनाशी तत्व बताने का अनुरोध किया | शिवजी की माया से मोहित ब्रह्माजी उस तत्व को न जानते हुए भी इस प्रकार कहने लगे - मैं ही इस संसार को उत्पन्न करने वाला स्वयंभू, अजन्मा, एक मात्र ईश्वर , अनादी भक्ति, ब्रह्म घोर निरंजन आत्मा हूँ|   मैं ही प्रवृति उर निवृति का मूलाधार , सर्वलीन पूर्ण ब्रह्म हूँ। ब्रह्मा जी ऐसा की पर मुनि मंडली में विद्यमान विष्णु जी ने उन्हें समझाते हुए कहा की मेरी आज्ञा से तो तुम सृष्टी के रचियता बने हो, मेरा अनादर करके तुम अपने प्रभुत्व की बात कैसे कर रहे हो?   इस प्रकार ब्रह्मा और विष्णु अपना-अपना प्रभुत्व स्थापित करने लगे और अपने पक्ष के समर्थन में शास्त्र वाक्य उद्घृत करने लगे। अंततः वेदों से पूछने का निर्णय हुआ तो स्वरुप धारण करके आये चारों वेदों ने क्रमशः अपना मत इस प्रकार प्रकट किया -   ऋग्वेद- जिसके भीतर समस्त भूत निहित हैं तथा जिससे सब कुछ प्रवत्त होता है और जिसे परमात्व कहा जाता है, वह एक रूद्र रूप ही है।   यजुर्वेद- जिसके द्व...

जाने बीजेपी के प्रवक्ता संबित पात्रा और सुधांशु त्रिवेदी के बारे में (LETS KNOW ABOUT BJP SPOKESPERSON SAMBIT PATRA AND SUDHANSHU TRIVEDI)

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भा रतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के दो दिग्गज और तेज तर्रार प्रवक्ता संबित पात्रा और सुधांशु त्रिवेदी किसी भी जान - पहचान के मोहताज़ नहीं है। अक्सर इन दोनों प्रवक्ताओं को इलेक्ट्रॉनिक मीडिया (न्यूज़ चैनल्स) पर आपने विभिन्न पार्टियों के नेताओं के साथ Debate करते जरूर देखा होगा। दोनों ही बड़े ही बेबाकी के साथ अपना पक्ष और उत्तर देने के लिए जाने जाते हैं। बहुत ही कम ऐसा देखने को मिलता है की कोई दूसरे दल के प्रवक्ता या नेता इन दोनों पर हावी हो अक्सर इनका पलड़ा ही भारी होता है और इसका कारण है इन दोनो के बात करने की कला और कोई भी अपनी बात बेबाकी से तभी रख सकता है जब वो तथ्यों के आधार पर बात करे और यही संबित पात्रा और सुधांशु त्रिवेदी करते है। किसी भी News Channel के Debate Show में आने से पहले ये दोनों अपना Home Work काफ़ी अच्छे तरीके से करके आते हैं तथा Evidence के बल बुते ये Debate Show में अपना स्थान बनाये रखने में कामयाब होते है। आइये इन दोनों से जुड़ी कुछ जानकारियाँ जानते हैं! संबित पात्रा (SAMBIT PATRA)  Image Source : twitter.com/sambitswaraj बीजेपी के तेज तर्रार और प्रभावशाली प्रवक्ता...