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केतकी के फूल से शिव जी की पूजा क्यों नहीं होती- Shiv Puran

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ए क बार ब्रह्माजी व विष्णुजी में विवाद छिड़ गया कि दोनों में श्रेष्ठ कौन है। ब्रह्माजी सृष्टि के रचयिता होने के कारण श्रेष्ठ होने का दावा कर रहे थे और भगवान विष्णु पूरी सृष्टि के पालनकर्ता के रूप में स्वयं को श्रेष्ठ कह रहे थे।  तभी वहां एक विराट ज्योतिर्मय लिंग प्रकट हुआ। दोनों देवताओं ने सर्वानुमति से यह निश्चय किया गया कि जो इस लिंग के छोर का पहले पता लगाएगा, उसे ही श्रेष्ठ माना जाएगा।  अत: दोनों विपरीत दिशा में शिवलिंग का छोर ढूढंने निकले। छोर न मिलने के कारण विष्णुजी लौट आए। ब्रह्माजी भी सफल नहीं हुए, परंतु उन्होंने आकर विष्णुजी से कहा कि वे छोर तक पहुँच गए थे।  उन्होंने केतकी के फूल को इस बात का साक्षी बताया। केतकी के पुष्प ने भी ब्रह्माजी के इस झूठ में उनका साथ दिया। ब्रह्माजी के असत्य कहने पर स्वयं भगवान शिव वहां प्रकट हुए और उन्होंने ब्रह्माजी की आलोचना की।  दोनों देवताओं ने महादेव की स्तुति की, तब शिवजी बोले कि मैं ही सृष्टि का कारण, उत्पत्तिकर्ता और स्वामी हूँ। मैंने ही तुम दोनों को उत्पन्न किया है। शिव ने केतकी पुष्प को झूठा साक्ष्य देने के लिए दंडित करते...

कथा रावण के जन्म की- Shiv Puran

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ये उस काल की कथा है जब श्रीराम अयोध्या में राज्य करने लगे तब एक दिन समस्त ऋषि-मुनि श्रीरघुनाथजी का अभिनन्दन करने के लिये अयोध्यापुरी में आये। श्रीरामचन्द्रजी ने उन सबका यथोचित सत्कार किया। वार्तालाप करते हुये अगस्त्य मुनि कहने लगे, युद्ध में आपने जो रावण का संहार किया, वह कोई बड़ी बात नहीं है, परन्तु द्वन्द युद्ध में लक्ष्मण के द्वारा इन्द्रजित का वध सबसे अधिक आश्चर्य की बात है।  यह मायावी राक्षस युद्ध में सब प्राणियों के लिये अवध्य था। उनकी बात सुनकर रामचन्द्रजी को बड़ा आश्चर्य हुआ। वे बोले, मुनिवर रावण और कुम्भकर्ण भी तो महान पराक्रमी थे, फिर आप केवल इन्द्रजित मेघनाद की ही इतनी प्रशंसा क्यों करते हैं? महोदर, प्रहस्त, विरूपाक्ष भी कम वीर न थे।  इस पर अगस्त्य मुनि बोले, इस प्रश्न का उत्तर देने से पहले मैं तुम्हें रावण के जन्म, वर प्राप्ति आदि का विवरण सुनाता हूँ। ब्रह्मा जी के पुलस्त्य नामक पुत्र हुये थे जो उन्हीं के समान तेजस्वी और गुणवान थे। एक बार वे महगिरि पर तपस्या करने गये। वह स्थान अत्यन्त रमणीक था। इसलिये ऋषियों, नागों, राजर्षियों आदि की कन्याएँ वहाँ क्रीड़ा करने आ जा...

हनुमान अवतार- Shiv Puran

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लं कादहन के संबंध में यही माना जाता है कि सीता जी की खोज करते हुए लंका पहुंचे और रावण के पुत्र सहित अनेक राक्षसों का अंत कर दिया। तब रावण के पुत्र मेघनाद ने श्री हनुमान को ब्रह्मास्त्र छोड़कर काबू किया और रावण ने श्री हनुमान की पूंछ में आग लगाने का दण्ड दिया। तब उसी जलती पूंछ से श्री हनुमान ने लंका में आग लगा रावण का दंभ चूर किया। किंतु पुराणों में लंकादहन के पीछे भी एक ओर रोचक कथा जुड़ी है, जिसके कारण श्री हनुमान ने पूंछ से लंका में आग लगाई।  हनुमान जी भगवान शिव के अवतार है। शिव से ही जुड़ा है यह रोचक प्रसंग। एक बार माता पार्वती की इच्छा पर शिव ने कुबेर से सोने का सुंदर महल का निर्माण करवाया। किंतु रावण इस महल की सुंदरता पर मोहित हो गया। वह ब्राह्मण का वेश रखकर शिव के पास गया। उसने महल में प्रवेश के लिए शिव-पार्वती से पूजा कराकर दक्षिणा के रूप में वह महल ही मांग लिया। भक्त को पहचान शिव ने प्रसन्न होकर वह महल दान दे दिया।  दान में महल प्राप्त करने के बाद रावण के मन में विचार आया कि यह महल असल में माता पार्वती के कहने पर बनाया गया। इसलिए उनकी सहमति के बिना यह शुभ नहीं होगा। तब ...

भगवान विष्णु और सुदर्शन चक्र- Shiv Puran

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भ गवान श्रीहरि विष्णु जी के हर चित्र व मूर्ति में उन्हें सुदर्शन चक्र धारण किए दिखाया जाता है। यह सुदर्शन चक्र भगवान शंकर ने ही जगत कल्याण के लिए भगवान विष्णु को दिया था। इस संबंध में शिवमहापुराण के कोटिरुद्रसंहिता में एक कथा का उल्लेख है।  "एक बार जब राक्षसों के अत्याचार बहुत बड़ गए तब सभी देवता श्रीहरि विष्णु जी के पास आए। तब भगवान विष्णु ने कैलाश पर्वत पर जाकर भगवान शिव की विधिपूर्वक आराधना की। वे हजार नामों से शिव की स्तुति करने लगे। प्रत्येक नाम पर एक कमल पुष्प भगवान विष्णु शिव को चढ़ाते। तब भगवान शंकर ने विष्णु जी की परीक्षा लेने के लिए उनके द्वारा लाए एक हजार कमल में से एक कमल का फूल छिपा दिया।  शिव की माया के कारण विष्णु जी को यह पता न चला। एक फूल कम पाकर भगवान विष्णु जी उसे ढूंढने लगे। परंतु फूल नहीं मिला। तब विष्णु जी ने एक फूल की पूर्ति के लिए अपना एक नेत्र निकालकर शिव को अर्पित कर दिया।  विष्णु जी की भक्ति देखकर भगवान शंकर बहुत प्रसन्न हुए और श्रीहरि के समक्ष प्रकट होकर वरदान मांगने के लिए कहा। तब विष्णु जी ने दैत्यों को समाप्त करने के लिए अजेय शस्त्र का वरदान...

कथा समुद्र मंथन की!

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ए क बार की बात है भगवान शंकर के दर्शनों के लिए दुर्वासा ऋषि अपने शिष्यों के साथ कैलाश जा रहे थे। मार्ग में उन्हें देवराज इन्द्र मिले। इन्द्र ने दुर्वासा ऋषि और उनके शिष्यों को भक्तिपूर्वक प्रणाम किया। तब दुर्वासा ने इन्द्र को आशीर्वाद देकर विष्णु भगवान का पारिजात पुष्प प्रदान किया। इन्द्रासन के गर्व में चूर इन्द्र ने उस पुष्प को अपने ऐरावत हाथी के मस्तक पर रख दिया। उस पुष्प का स्पर्श होते ही ऐरावत सहसा विष्णु भगवान के समान तेजस्वी हो गया। उसने इन्द्र का परित्याग कर दिया और उस दिव्य पुष्प को कुचलते हुए वन की ओर चला गया।  इन्द्र द्वारा भगवान विष्णु के पुष्प का तिरस्कार होते देखकर दुर्वाषा ऋषि के क्रोध की सीमा न रही। उन्होंने देवराज इन्द्र को श्री (लक्ष्मी) से हीन हो जाने का शाप दे दिया। दुर्वासा मुनि के शाप के फलस्वरूप लक्ष्मी उसी क्षण स्वर्गलोक को छोड़कर अदृश्य हो गईं। लक्ष्मी के चले जाने से इन्द्र आदि देवता निर्बल और श्रीहीन हो गए। उनका वैभव लुप्त हो गया। इन्द्र को बलहीन जानकर दैत्यों ने स्वर्ग पर आक्रमण कर दिया और देवगण को पराजित करके स्वर्ग के राज्य पर अपनी परचम फहरा दिया।  ...

कथा भगवान शिव के रूप अर्धनारीश्वर की - shiv Puran

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अर्धनारीश्वर रूप इ स संसार के प्रारंभ में जब ब्रह्माजी द्वारा रची गई मानसिक सृष्टि विस्तार न पा सकी, तब ब्रह्माजी को बहुत दुःख हुआ। उसी समय आकाशवाणी हुई हे ब्रह्मन्! अब आप मैथुनी सृष्टि करो। आकाशवाणी सुनकर ब्रह्माजी ने मैथुनी सृष्टि रचने का निश्चय तो कर लिया, किंतु उस समय तक नारियों की उत्पत्ति न होने के कारण वे अपने निश्चय में सफल नहीं हो सके।  तब ब्रह्माजी ने सोचा कि परमेश्वर शिव की कृपा के बिना मैथुनी सृष्टि नहीं हो सकती। अतः वे उन्हें प्रसन्न करने के लिए कठोर तप करने लगे। बहुत दिनों तक ब्रह्माजी अपने हृदय में प्रेमपूर्वक महेश्वर शिव का ध्यान करते रहे। उनके तीव्र तप से प्रसन्न होकर भगवान उमा-महेश्वर ने उन्हें अर्द्धनारीश्वर रूप में दर्शन दिया। महेश्वर शिव ने कहा- पुत्र ब्रह्मा, तुमने प्रजाओं की वृद्धि के लिए जो कठिन तप किया है, उससे मैं परम प्रसन्न हूँ। मैं तुम्हारी इच्छा अवश्य पूरी करूंगा। ऐसा कहकर शिवजी ने अपने शरीर के आधे भाग से उमा देवी को अलग कर दिया। ब्रह्मा ने कहा.-एक उचित सृष्टि निर्मित करने में अब तक मैं असफल रहा हूँ। मैं अब स्त्री-पुरुष के समागम से मैं प्रजाओं को उत्...

तपस्या का फल- Shiv Puran

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भ गवान भोले-शंकर को पति के रूप में पाने हेतु माता-पार्वती कठोर तपस्या कर रही थी। उनकी तपस्या पूर्णता की ओर थी। एक समय वह भगवान के चिंतन में ध्यान मग्न बैठी थी। उसी समय उन्हें एक बालक के डुबने की चीख सुनाई दी। माता तुरंत उठकर वहां पहुंची। उन्होंने देखा एक मगरमच्छ बालक को पानी के भीतर खींच रहा है।  बालक अपनी जान बचाने के लिए प्रयास कर रहा है, तथा मगरमच्छ उसे आहार बनाने का। करुणामयी मां को बालक पर दया आ गई। उन्होंने मगरमच्छ से निवेदन किया कि बालक को छोड़ दीजिए इसे आहार न बनाएं। मगरमच्छ बोला माता यह मेरा आहार है मुझे हर छठे दिन उदर पूर्ति हेतु जो पहले मिलता है, उसे मेरा आहार ब्रह्मा ने निश्चित किया है। माता ने फिर कहा आप इसे छोड़ दे इसके बदले मैं अपनी तपस्या का फल दुंगी। मगरमच्छ ने कहा ठीक है। माता ने उसी समय संकल्प कर अपनी पूरी तपस्या का पुण्य फल उस मगरमच्छ को दे दिया।  मगरमच्छ तपस्या के फल को प्राप्त कर सूर्य की भांति चमक उठा। उसकी बुद्धि भी शुद्ध हो गई। उसने कहां माता आप अपना पुण्य वापस ले लें। मैं इस बालक को यू हीं छोड़ दुंगा। माता ने मना कर दिया तथा बालक को गोद में लेकर ममताम...

धनपति कुबेर जी का अहंकार- Shiv Puran

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य ह एक पौराणिक कथा है। धन के देवता कुबेर तीनों लोकों में सबसे धनी थे। एक दिन उन्होंने सोचा कि हमारे पास इतनी संपत्ति है, लेकिन कम ही लोगों को इसकी जानकारी है। इसलिए उन्होंने अपनी संपत्ति का प्रदर्शन करने के लिए एक भव्य भोज का आयोजन करने की बात सोची। उसमें तीनों लोकों के सभी देवताओं को आमंत्रित किया गया।  भगवान शिव उनके इष्ट देवता थे, इसलिए उनका आशीर्वाद लेने वह कैलाश पहुंचे और कहा, प्रभो! आज मैं तीनों लोकों में सबसे धनवान हूँ, यह सब आप की कृपा का फल है। अपने निवास पर एक भोज का आयोजन करने जा रहा हूँ, कृपया आप परिवार सहित भोज में पधारने की कृपा करे।  भगवान शिव कुबेर के मन का अहंकार ताड़ गए, बोले, वत्स! मैं कहीं बाहर नहीं जाता। कुबेर गिड़गिड़ाने लगे, भगवन! आपके बगैर तो मेरा सारा आयोजन बेकार चला जाएगा। तब शिव जी ने कहा, एक उपाय है। मैं अपने छोटे बेटे गणपति को तुम्हारे भोज में जाने को कह दूंगा। कुबेर संतुष्ट होकर लौट आए। नियत समय पर कुबेर ने भव्य भोज का आयोजन किया।  तीनों लोकों के देवता पहुँच चुके थे। अंत में गणपति आए और आते ही कहा, मुझको बहुत तेज भूख लगी है। भोजन कहां है। कुब...

भगवान शिव और देवी सती का विवाह - Shiv Puran

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Bhagwan Shiv & Devi Parvati रा जा दक्ष प्रजापति की कई पुत्रियां थी। सभी पुत्रियां गुणवती थीं, फिर भी दक्ष के मन में संतोष नहीं था। वे चाहते थे उनके घर में एक ऐसी पुत्री का जन्म हो, जो सर्व शक्तिसंपन्न हो एवं सर्व विजयिनी हो। जिसके कारण दक्ष एक ऐसी हि पुत्री के लिए तप करने लगे। तप करते करते अधिक दिन बीत गए, तो भगवती आद्या ने प्रकट होकर कहा, मैं तुम्हारे तप से प्रसन्न हूं। तुम किस कारण वश तप कर रहे हो? दक्ष नें तप करने का कारण बताय तो मां बोली मैं स्वय पुत्री रूप में तुम्हारे यहां जन्म धारण करूंगी। मेरा नाम होगा सती। मैं सती के रूप में जन्म लेकर अपनी लीलाओं का विस्तार करूंगी। फलतः भगवती आद्या ने सती रूप में दक्ष के यहां जन्म लिया। सती दक्ष की सभी पुत्रियों में सबसे अलौकिक थीं। सतीने बाल्य अवस्था में ही कई ऐसे अलौकिक आश्चर्य चलित करने वाले कार्य कर दिखाए थे, जिन्हें देखकर स्वयं दक्ष को भी विस्मयता होती रहती थी। जब सती विवाह योग्य होगई, तो दक्ष को उनके लिए वर की चिंता होने लगी। उन्होंने ब्रह्मा जी से इस विषय में परामर्श किया। ब्रह्मा जी ने कहा, सती आद्या का अवतार हैं। आद्या आदि शक्ति औ...

भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह- Shiv Puran

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🕉 ज ब माता सती के स्वयं को योग अग्नि में भस्म कर लेने का समाचार शिवजी के पास पहुँचा। तब शिवजी ने वीरभद्र को भेजा। उन्होंने वहां जाकर यज्ञ विध्वंस कर डाला और सब देवताओं को यथोचित फल दिया। माता सती ने मरते समय शिव से यह वर मांगा कि हर जन्म में आप ही मेरे पति हों। इसी कारण उन्होंने हिमाचल के घर जाकर पार्वती का जन्म लिया।  जब से पार्वती हिमाचल के घर में जन्म तब से उनके घर में सुख और सम्पतियां छा गई। पार्वती जी के आने से पर्वत शोभायमान हो गया। जब नारद जी ने ये सब समाचार सुने तो वे हिमाचल पहुंचे। वहां पहुंचकर वे हिमाचल से मिले और हंसकर बोले तुम्हारी कन्या गुणों की खान है। यह स्वभाव से ही सुन्दर, सुशील और शांत है। यह कन्या सुलक्षणों से सम्पन्न है। यह अपने पति को प्यारी होगी।  अब इसमें जो दो चार अवगुण है वे भी सुन लो। गुणहीन, मानहीन, माता-पिता विहीन, उदासीन, लापरवाह। इसका पति नंगा, योगी, जटाधारी और सांपों को गले में धारण करने वाला होगा।  यह बात सुनकर पार्वती के माता-पिता चिंतित हो गए। उन्होंने देवर्षि से इसका उपाय पूछा। तब नारद जी बोले जो दोष मैंने बताए मेरे अनुमान से वे सभी शिव...

कथा भगवती माता तुलसी की- Shiv Puran

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  Basil Plant (Tulsi) ए क बार देवराज इंद्र देवगुरू बृहस्पति के साथ भगवान शिव का दर्शन करने कैलाश गए। महादेव ने दोनों की परीक्षा लेनी चाही इसलिए वे रूप बदलकर अवधूत बन गए, और वो निर्वस्त्र भी थे। उनका शरीर जलती हुई अग्नि के समान धधक रहा था और अत्यंत भयंकर नजर आते थे। अवधूत दोनों के रास्ते में खड़े हो गए। इंद्र ने एक विचित्र पुरुष को रास्ते में खड़े देखा तो चौंक गए। इंद्र को देवराज होने का गर्व घेरने लगा। उन्होंने उस भयंकर पुरुष से पूछा तुम कौन हो? भगवान शिव अभी कैलाश पर विराज रहे हैं या कहीं भ्रमण पर हैं। मैं उनके दर्शन के लिए आया हूं। इंद्र ने कई प्रश्न किए लेकिन वह पुरुष योगियों के समान मौन ही रहे। इंद्र को लगा कि एक साधारण प्राणी उनका अपमान कर रहा है। उनके मन में देवराज होने का अहंकार उपजा जो क्रोध में बदल गया। इंद्र ने कहा मेरे बारबार अनुरोध पर भी तू कुछ नहीं बोलकर मेरा अपमान कर रहा है। मैं तुझे अभी दंड देता हूं। ऐसा कहकर इंद्र ने वज्र उठा लिया। भगवान शिव ने वज्र को उसी समय स्तंभित यानी जड़ कर दिया।  इंद्र की बांह अकड़ गई। भगवान अवधूत क्रोध से लाल हो गए। बृहस्पति उनके चेहरे ...

इस प्रकार से हुई देवी के 51 शक्तिपीठों की स्थापना - Shiv Puran

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51 शक्तिपीठ प्र जापति दक्ष की पुत्री सती से भगवान शिव का विवाह हुआ। कुछ समय बाद दक्ष को पूरे ब्रह्माण्ड का अधिपति बना दिया गया। इससे दक्ष में अभिमान आ गया। वह अपने आपको सर्वश्रेष्ठ समझने लगा। एक यज्ञ में भगवान शिव द्वारा खुद को प्रणाम न करने पर दक्ष ने उन्हें अनेक अपशब्द कहे। दक्ष ने शिव को शाप दिया कि उन्हें देव यज्ञ में उनका हिस्सा नहीं मिलेगा।   यह सुनकर नंदी ने भी दक्ष को शाप दिया कि जिस मुंह से वह शिव निंदा कर रहा है वह बकरे का हो जाएगा।   कुछ समय बाद दक्ष ने एक भव्य यज्ञ का आयोजन किया। उसमें सभी देवी-देवताओं को बुलाया गया पर अभिमानी दक्ष ने शिव को उस यज्ञ से बहिष्कृत कर दिया। किसी तरह सती को यह पता चला तो उन्होंने शिव से उस यज्ञ में जाने की अनुमति मांगी। पहले तो शिव ने उन्हें समझाया पर जब वे नहीं मानीं तो उन्होंने सती को वहां जाने की अनुमति दे दी। सती अपने पिता के घर पहुंची तो दक्ष ने उनसे आंखें फेर लीं। सती यज्ञ में शिव का भाग न देखकर रूष्ट हो गईं और सभी को बुरा-भला कहने लगीं।   यह सुनकर दक्ष ने भी शिव निंदा प्रारम्भ कर दी।यह सुनकर सती को बड़ा दुख हु...

कथा भगवान शिव-शंकर के पूर्ण रूप काल भैरव की - Shiv Puran

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Bhagwan Shiva ए क बार की बात है सुमेरु पर्वत पर बैठे हुए ब्रम्हाजी के पास जाकर देवताओं ने उनसे अविनाशी तत्व बताने का अनुरोध किया | शिवजी की माया से मोहित ब्रह्माजी उस तत्व को न जानते हुए भी इस प्रकार कहने लगे - मैं ही इस संसार को उत्पन्न करने वाला स्वयंभू, अजन्मा, एक मात्र ईश्वर , अनादी भक्ति, ब्रह्म घोर निरंजन आत्मा हूँ|   मैं ही प्रवृति उर निवृति का मूलाधार , सर्वलीन पूर्ण ब्रह्म हूँ। ब्रह्मा जी ऐसा की पर मुनि मंडली में विद्यमान विष्णु जी ने उन्हें समझाते हुए कहा की मेरी आज्ञा से तो तुम सृष्टी के रचियता बने हो, मेरा अनादर करके तुम अपने प्रभुत्व की बात कैसे कर रहे हो?   इस प्रकार ब्रह्मा और विष्णु अपना-अपना प्रभुत्व स्थापित करने लगे और अपने पक्ष के समर्थन में शास्त्र वाक्य उद्घृत करने लगे। अंततः वेदों से पूछने का निर्णय हुआ तो स्वरुप धारण करके आये चारों वेदों ने क्रमशः अपना मत इस प्रकार प्रकट किया -   ऋग्वेद- जिसके भीतर समस्त भूत निहित हैं तथा जिससे सब कुछ प्रवत्त होता है और जिसे परमात्व कहा जाता है, वह एक रूद्र रूप ही है।   यजुर्वेद- जिसके द्व...

जाने बीजेपी के प्रवक्ता संबित पात्रा और सुधांशु त्रिवेदी के बारे में (LETS KNOW ABOUT BJP SPOKESPERSON SAMBIT PATRA AND SUDHANSHU TRIVEDI)

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भा रतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के दो दिग्गज और तेज तर्रार प्रवक्ता संबित पात्रा और सुधांशु त्रिवेदी किसी भी जान - पहचान के मोहताज़ नहीं है। अक्सर इन दोनों प्रवक्ताओं को इलेक्ट्रॉनिक मीडिया (न्यूज़ चैनल्स) पर आपने विभिन्न पार्टियों के नेताओं के साथ Debate करते जरूर देखा होगा। दोनों ही बड़े ही बेबाकी के साथ अपना पक्ष और उत्तर देने के लिए जाने जाते हैं। बहुत ही कम ऐसा देखने को मिलता है की कोई दूसरे दल के प्रवक्ता या नेता इन दोनों पर हावी हो अक्सर इनका पलड़ा ही भारी होता है और इसका कारण है इन दोनो के बात करने की कला और कोई भी अपनी बात बेबाकी से तभी रख सकता है जब वो तथ्यों के आधार पर बात करे और यही संबित पात्रा और सुधांशु त्रिवेदी करते है। किसी भी News Channel के Debate Show में आने से पहले ये दोनों अपना Home Work काफ़ी अच्छे तरीके से करके आते हैं तथा Evidence के बल बुते ये Debate Show में अपना स्थान बनाये रखने में कामयाब होते है। आइये इन दोनों से जुड़ी कुछ जानकारियाँ जानते हैं! संबित पात्रा (SAMBIT PATRA)  Image Source : twitter.com/sambitswaraj बीजेपी के तेज तर्रार और प्रभावशाली प्रवक्ता...

जाने पूरी प्रक्रिया अपने Mobile Number को Aadhar से Link करने का

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Aadhar को Mobile Number से कैसे Link करें? जाने पूरी प्रक्रिया अपने मोबाइल नंबर को आधार से लिंक करने का :- आ धार कार्ड आज की तारीख में सबसे उपयोगी दस्तावेज़ प्रत्येक भारतीय के लिए बन चूका है। आपको कुछ भी सरकारी काम करवाना हो तो मान कर चलिए कि    आधार कार्ड तो लगना ही लगना है। यदि आपका आधार अभी तक आपके Mobile No. से Link नहीं हुआ है तो आप तुरंत इसे लिंक कर लें। ये कई मायनों में आपके लिए काफी helpful होगा तो यदि आपके आधार ( Aadhaar) के साथ मोबाइल नंबर रजिस्टर्ड है तो आप बिना किसी परेशानी के इनकम टैक्स रिटर्न फाइल कर सकते हैं. इसेक अलावा , सरकारी योजनाओं का फायदा भी आसानी से उठा सकते हैं। आप चाहें तो अपनी प्राइवेसी के लिए मोबाइल नंबर न देने पर कोई परेशानी नहीं होगी। लेकिन   Number Register नहीं होने पर कुछ सुविधाओं का Benefit नहीं मिलेगा। तो आइये आधार को मोबाइल से लिंक करने की प्रक्रिया को जानते है। Online प्रक्रिया - इस प्रक्रिया का उपयोग करके Customer घर पर रहते हुए लिंकिंग की प्रक्रिया को पूरा कर सकते हैं। ये प्रक्रिया कुछ इस तरह से होंगी : - अपने Teleco...

Lets Know These Things About Bhojpuri Language - भोजपुरी भाषा

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Bhojpuri Language भो जपुरी शब्द बिहार के एक प्राचीन जिले भोजपुर (जो की आज भी अस्तित्व में है) के नाम पर पड़ा। इस जिले का नामकरण महान सम्राट विक्रमादित्य के वंशज राजा भोज के द्वारा किया गया था। भोजपुरी भाषा एक बेहद सुनने में मीठी तथा बोलने में सरल भाषा है ये कुछ कुछ हिंदी भाषा से भी मिलता जुलता प्रतीत होता है। ये भाषा ज़्यादातर पश्चिमी बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रों में बोली जाती है। और ये क्षेत्र है बिहार राज्य के "सारन (छपरा), सिवान, बक्सर, रोहतास, पटना, पश्चिमी चंपारण, उत्तरी चंपारण, भोजपुर, वैशाली, गोपालगंज, भभुआ'। तथा उत्तर प्रदेश राज्य के "बलिया (जिसे बाग़ी बलिया भी कहा जाता है), मऊ, गाजीपुर, गोरखपुर, वाराणसी/बनारस/काशी, चंदौली, जौनपुर, सुल्तानपुर, आजमगढ़, प्रतापगढ़, बस्ती, मिर्ज़ापुर, बहराईच, फैज़ाबाद, गोंडा, सिद्धार्थ नगर व इलाहाबाद।  आपको बता दें कि भोजपुरी भाषा सिर्फ बिहार और उत्तर प्रदेश में ही नहीं बल्कि झारखंड के कुछ जिलों में भी बोली जाती है साथ ही साथ भोजपुरी की पहुँच विदेशों तक भी फैली हुई है ये नाम है जैसे नेपाल, मॉरीसस, फिजी, सूरीनाम, गुयाना, सिंगापुर...

इन आसान तरीकों से प्रधानमंत्री जन-धन Account Balance Check किया जा सकता है

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प्रधानमंत्री जन-धन योजना Account Balance Check :-  Image Source :   https://www.india.gov.in मोदी-भाजपा सरकार द्वारा विगत Lockdown के दौरान सरकार द्वारा महिला जन-धन खाता धारकों के अकाउंट में तीन महीने (अप्रैल, मई और जून) के लिए 500 रुपये की तीन किस्तें सहयोग राशि के रूप में दिए जाने की घोषणा की गई थी जिसमे आपको बता दें की अब वो तीनो किस्तें लगभग 20 करोड़ महिला खाता धारकों के अकाउंट में डाला जा चूका है। दरअसल ये योजना मोदी सरकार द्वारा Lockdown में अपना घर चलाने के लिए महिलाओं को दी गयी एक छोटी सी मदद के तौर पर थी।  आपको बता दें कि अब पुरे भारत में Unlock की शुरुआत हो चुकी है सब कुछ खोला जा चुका है सिर्फ Education से सम्बंधित संस्थाएँ फ़िलहाल बंद हैं लेकिन हमे ये नहीं भूलना चाहिए की Lockdown खत्म हुई है ना की कोरोना वायरस तो इसलिए ऐसे में थोड़ा महिलाओं को सावधानी बरतनी चाहिए और बैलेंस के बारें में विवरण जानने के लिए डायरेक्ट बैंक Visit नहीं करनी चाहिए। इसलिए मै जो जन-धन Account बैलेंस Check करने का तरीका बता रहा हूँ उसे आप Follow कर सकते है। इससे आप आसानी से घर बैठे अपने खात...